ipl 2012 : अगर आपको याद नहीं है तो मैं बता सकता हु 27 मई को कैसे कोलकाता नाइट राइडर्स ने जीता था अपना पहला ipl खिताब. ipl 2012 के फाइनल में चेन्नई और कोलकाता की टीम आमने सामने थी और सभी को यही उम्मीद थी कि इस बार चेन्नई सुपर किंग्स हैट्रिक लगाएगी. लेकिन कोलकाता के इरादे तो कुछ और ही थे.

ipl 2012 जब शुरू हुआ था तब ही से कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए केवल एक टूर्नामेंट नहीं था. कोलकाता में एक गंभीर युग की शुरुवात हुई थी ‘कोरबो लड़बो जीतबो’ और आपको बता दे कि जब पिछली साल में गौतम गंभीर को जब कप्तान बनाया गया तभी से ये लगा कि कोलकाता अब ट्रॉफी जीतने वाली है यही वजह था कि इस साल केकेआर ने अपनी पहली ट्रॉफी जीती.
ipl 2012 का रोमांच
आईपीएल का पांचवा सीजन 4 अप्रैल से 27 मई तक चल इस टूर्नामेंट पिछली बार की तरह 10 टीमें नहीं बल्कि 9 टीमों ने ही भाग लिया क्योंकि bcci ने कोच्चि टक्कर्स केरल को इस साल के लिए सस्पेंड कर दिया था. और इसकी वजह से ipl जगत में पूरा हाहाकार मचा दिया था.
इस साल के ipl का बुखार भी पूरी दुनिया में क्रिकेट फैन के सर चढ़ कर बोल रहा था. इस साल के आईपीएल में वो हुआ जो कोई भी क्रिकेट फैन नहीं सोच रहा था. पिछले 4 साल में जो कोलकाता की टीम प्वाइंट टेबल में सबसे नीचे रही थी लेकिन इस बार कोलकाता ने सभी को चौंकाते हुए अपना नाम ipl के इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों से लिख दिया.
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गंभीर के कप्तानी और नरेन के जादू से हुआ कोलकाता नाइट राइडर्स का उदय
अगर कोई आपसे पूछे इस ipl की सबसे अच्छी बात तो. इस ipl के सीजन में सबसे अगर किसी ने उलटफेर किया इस सीजन में केकेआर के मालिक शाहरुख खान ने गौतम गंभीर को कप्तान बनाया और अपनी टीम में नई उत्साह भरा.
उस साल केकेआर के स्पिनर्स सुनील नरेन ने अपनी स्पिन से किसी भी बल्लेबाज को चलने नहीं दिया और बांध के रखा था. अगर हम एक लाइन में कहे तो केकेआर को चैम्पियन बनाने में सबसे बड़ा हाथ सुनील नरेन का है. सुनील नरेन ने इस पूरे साल सीजन में कुल 24 विकेट लिए वो भी मात्र 5.47 के इकॉनमी रेट्स से जो टी20 में किसी जादुई करिश्में से कम नहीं है और इसके लिए उनको प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया था.
ipl 2012 के प्रमुख आंकड़े
आईपीएल के इस पांचवे सीजन में कोलकाता नाइट राइडर्स चैंपियन बन कर उभरा तो इसके साथ ही कुछ और नए रिकॉर्ड बने आइए जानते है. इस साल rcb की तरफ से खेलते हुए क्रिश गेल ने शानदार खेल दिखाया और 733 रन बनाए जिसमें 1शतक और 7 हॉफ सेंचुरी भी लगाई और इसके लिए उनको ऑरेंज कैप दिया है.
अब इस साल के गेदबाजी आंकड़े की बात करे तो मोर्ने मोर्कल दिल्ली डेयरडेविल्स की तरफ से खेलते हुए 25 विकेट चटकाए जिसके लिए उनको पर्पल कैप चुना गया था. इस सीजन में सबसे अधिक छक्का क्रिस गेल ने 59 लगाए.
क्रिश गेल का तूफान
हम बात करे आईपीएल 2012 की और उसमें क्रिश गेल की बात ना हो ये तो सरासर बेइमानी होगी. क्यों कि उस साल किसी बल्लेबाज का तूफान आया था तो वो था क्रिश गेल. उस साल क्रिश गेल ने सभी गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाई और मात्र 15 मैच खेलते हुए 733 रन बना डाले. उन्होंने अपनी इस पारी में कई ऐसे गगनचुंबी छक्के लगाए जो आज भी फैंस के जेहन में याद है. आपको बता दे की गेल ने इतनी जबरदस्त बल्लेबाजी की लेकिन फिर भी rcb को प्लेऑफ में नहीं पहुंचा पाए.
आईपीएल 2012 के ऐतिहासिक फाइनल csk vs kkr
साल 2012 का फाइनल चेन्नई के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेला जाना था एक तरफ थी पीली जर्सी में धोनी की सेना तीसरी बार खिताब जीतने के लिए तो वही दूसरी तरफ थी पहली बार फाइनल में पहुंचने वाली कोलकाता की नाइट राइडर्स. और इस मैच में सभी को यही लग रहा था कि धोनी की सेना हैट्रिक लगाएगी पर किसी ने ये नहीं सोचा कि इसका उल्टा भी हो सकता है.

आपको बता दे कि इस फाइनल में चेन्नई सुपर किंग्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 190 रनों का विशाल स्कोर बनाया जिसमें सुरेश रैना ने 73 और मुरली विजय ने 42 रन की तूफानी पारी खेली थी. जैसे ही चेन्नई ने 190 रन बनाया तो सभी को लग रहा था कि इतना बड़ा रन चेज नहीं हो सकता है.
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लेकिन जैसे ही कोलकाता की टीम बैटिंग करने उतरी तो कप्तान गौतम गंभीर जल्दी आउट हो गई लेकिन इसी मैच में एक मनविंदर बिसला नाम का सितारा चमका. इस मैच में मनविंदर बिसला ने 48 गेंद में 89 रन की तूफानी खेलकर मैच को पानी तरफ मोड़ दिया इसके बाद जाक कैलिस ने 69 रन बनाए. सबसे अंत में आकर मनोज तिवारी ने बैक तो बैक 2 चौके लगाकर कोलकाता को पहली बार चैंपियन बना दिया. नाइट राइडर्स के लिए केवल यह एक ट्रॉफी नहीं बल्कि शाहरुख खान और फैंस के लिए सालों का एक इंतजार भी काम हुआ.
इस आईपीएल की कुछ अनदेखी बाते
इस सीजन कुछ और नए सितारे बन कर उभरे जो आज भी खेल रहे है. सबसे पहला नाम आता है अजिंक्य रहाणे इसी सीजन में राजस्थान रॉयल्स की तरफ से अपने ipl करियर का पहला शतक लगाए. सौरभ गांगुली की कप्तानी वाली टीम पुणे वॉरियर्स ने इस साल भी प्वाइंट टेबल ने सबसे निचले पायदान पर रही.
दिल्ली डेयरडेविल्स ने इस साल सहवाग की कप्तानी में बड़ी टीम बनकर जरूर उभरी लेकिन फिर प्लेऑफ ने नहीं पहुंच सकी. दिल्ली ने अपने ग्रुप स्टेज में 16 मैच में 11 मैच जीती थी फिर भी वो नाकआउट से बाहर हो गई. इस मैच में अमित मिश्रा ने इस सीजन में एक हैट्रिक भी लिया था.
