Ipl 2010 : वो साल था 2010 और पूरे भारत भर में आईपीएल का बुखार जोरो शोरो से क्रिकेट फैन के सर चढ़ कर बोल रहा था. लेकिन क्रिकेट फैंस के लिए इस साल एक और बड़ी खुशबरी मिली थी कि यह इस बार का आईपीएल भारत में लौट आया था. इसी आईपीएल में क्रिकेट के भगवान और थाला ने अपना अपना खुद का इतिहास लिखा था.

इस सीजन में आपको केवल 20 ओवर का क्रिकेट ही नहीं देखने को मिला बल्कि भावनाओं का तूफान देखने को मिला था स्टेडियम से लेकर टीवी स्क्रीन तक चिपके हर दर्शक अपनी टीम को सपोर्ट कर रहे थे. इसी सीजन में भारत के दो लीजेंड कप्तान फाइनल में थे. तो आइए जानते IPL 2010 की कुछ अनकही बातें जो आज भी फैन के दिलो पर राज करती है.
IPL 2010 में हुई थी घर वापसी
आईपीएल 2009 का आयोजन साउथ अफ्रीका में हुआ था लेकिन 2010 वाला आईपीएल फिर से भारत में लौट आया था. भारतीय फैंस का उत्साह अपने चरम पर था. इस साल आईपीएल एक विश्वस्तरीय ब्रांड बन चुका और हर मैच में दर्शक खचाखच भरे रहते और हर मैच में रोज नए रिकॉर्ड बनते और बिगड़ते थे.
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आपको बता दे कि इस साल भी आईपीएल में कुल 8 ही टीमों ने हिस्सा लिया था और कुल मिलाकर 60 मैच खेले गए थे. पर एक बात और थी जो इस टूर्नामेंट को और भी खास बनाती थी वो थी इस साल लगभग हर मैच अपने अंतिम गेंद तक जाता था. इसमें कोई भी मैच एक तरफा नहीं देखने को मिला.

इस साल गरजा था सचिन का बल्ला
इस आईपीएल की सबसे खास बात यह थी कि IPL 2010 में सचिन तेंदुलकर ने जमकर के रन बनाए जो लोग ये कह रहे थे कि सचिन केवल वनडे और टेस्ट मैच खेलते है उनके मुंह पर एक तमाचा था. सचिन ने इस आईपीएल कुल 15 मैच खेले थे जिसमें उन्होंने 618 रन बनाए थे और उनका औसत 47 का रहा.
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सचिन न केवल अच्छी बल्लेबाजी की बल्कि अपनी कप्तानी से उन्होंने ने मुंबई इंडियंस को पहली बार आईपीएल के फाइनल में भी पहुंचाया था. सचिन तेंदुलकर की इस सीजन की एक और बात खास बनाती है सचिन चोटिल होने के बाद भी फाइनल खेले थे और साबित कर दिया कि उनकी उमर केवल नंबर मात्र है. जिसको देखने के बाद सभी फैंस के आंखों में आंसु आ गए थे.
इस सीजन में ही निकला चेन्नई का असली सुपर किंग धोनी
आईपीएल 2010 ही वो साल था जिसने चेन्नई सुपर किंग्स को आईपीएल की सबसे बड़ी टीम बनने की रह पर चल पड़ी थी. शुरू में तो चेन्नई की टीम थोड़ी लड़खड़ाई फिर धोनी ने अपने जादुई और चतुराई भरी कप्तानी से इस टीम को न सिर्फ फाइनल में पहुंचाया और फिर पीछे मुड़कर भी नहीं देखा.

इसी आईपीएल के फाइनल में धोनी ने एक बार फिर से साबित किया कि वो स्टंप के पीछे से भी मैच को पलट सकते है. मुंबई और चेन्नई के बीच फाइनल चल रहा था और कीरोन पोलार्ड मैच को मुंबई इंडियंस के तरफ मोड़ दिए थे और तभी धोनी ने मिड ऑफ पर एक अतिरिक्त फील्डर खड़ा करा के पोलार्ड को कैच आउट कर दिया. और इसी के बाद से धोनी ने वो मैच और ट्रॉफी दोनों पर कब्जा कर लिया.
IPL 2010 के टॉप खिलाड़ी और अनोखे रिकॉर्ड
यह आईपीएल का सीजन भारत में हुआ और इसी वजह यहां से कई भारतीय खिलाड़ी स्टार बनकर उभरे और रातो रात अपना नाम बनाया. इसी कड़ी में सबसे पहला नाम आता है प्रज्ञान ओझा का जिसने डेक्कन चार्जेस की तरफ से खेलते हुए 21 विकेट चटकाए और पर्पल कैप जीता.
चेन्नई सुपर किंग की तरफ से खेलते हुए सुरेश रैना ने 520 रन बनाया और चेन्नई की तरफ से सबसे ज्यादा रन बनाए वाले बल्लेबाज बने इसके अलावा सुरेश रैना ने फाइनल में 57 रन की तूफानी पारी खेली थी. चेन्नई की टीम से सुरेश रैना के अलावा एक और शेर निकला जिसका नाम मुरली विजय था और मुरली विजय राजस्थान टीम के खिलाफ धुंआधार शतक लगाया था.
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सौरभ गांगुली ने ने KKR की तरफ से खेलते हुए 493 रन बनाए और कोलकाता नाइट राइडर की तरफ से सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी बने.
आईपीएल 2010 के कुछ अनोखे आंकड़े जो इस आईपीएल को और भी दिलचस्प बनाते है. इस IPL में आरसीबी के रॉबिन उथप्पा ने इस सीजन में सबसे ज्यादा 27 छक्के जड़े थे. इसके बाद इस आईपीएल का एक और अनोखा रिकॉर्ड बना जो आईपीएल 2010 को यूट्यूब पर पहली बार लाइव स्ट्रीम किया गया था.
राजस्थान रॉयल्स के तरफ से खेलते हुए यूसुफ पठान ने मुंबई इंडियंस के खिलाफ महज 37 गेंदों में शतक जड़कर सनसनी मचा दी और यह शतक उस समय के आईपीएल का सबसे तेज शतक भी था.

IPL 2010 FINAL की जंग में कैसे मारी थी चेन्नई बाजी
IPL 2010 FINAL मैच 25 अप्रैल को मुंबई के DY पाटिल स्टेडियम में हो रहा था और पूरा स्टेडियम दो हिस्सों में बट चुका था. एक तरफ थी मुंबई इंडियंस के फैन और दूसरी तरफ थे चेन्नई सुपर किंग्स के फैंस. इस फाइनल मैच में चेन्नई सुपर किंग्स और मुंबई इंडियंस की टीम आमने सामने थी और चेन्नई सुपर किंग की टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 168 रन बनाए जिसमें 57 रन तो केवल अकेले सुरेश रैना ने बनाएं थे.
लेकिन जब टीम मुंबई इंडियंस की टीम इस लक्ष्य का पीछा करने उतरी तो शुरुआत तो धीरे रही लेकिन एक छोर पर सचिन डेट रहे और लेकिन मिडिल ऑर्डर तो तास के पत्तों की तरह बिखर गई लेकिन अंत में पोलार्ड ने उम्मीद जगाई लेकिन धोनी की चतुराई के आगे मुंबई इंडियंस को 22 रनों से हार झेलनी पड़ी.
आईपीएल 2010 का विवाद
यह आईपीएल भी पिछली साल की तरह से विवादों से भरा रहा है. आईपीएल के तत्कालीन कमिश्नर ललित मोदी को पद से निलंबित कर दिया गया क्यों कि उन पर पैसों की हेराफेरी और अनुशासनहीनता का आरोप लगे थे. और इस विवाद के बाद आईपीएल के प्रशासनिक ढांचे को हमेशा के लिए बदल दिए गए.
पहले और अब के आईपीएल में फर्क
अगर हम बात करे आईपीएल 2010 की और इस समय की आईपीएल की तो बहुत फर्क दिखता है. उस समय 160-170 रन का स्कोर सुरक्षित माना जाता था लेकिन आज के समय में 200 रन भी सुरक्षित नहीं माना जाता.
उस समय DRS जैसी सुविधाएं नहीं थी लेकिन इस समय DRS जैसे सुविधा उपलब्ध है. उस समय के दौर में अंपायर का फैसला ही अंतिम निर्णय होता था. एक बात और थी उस समय यॉर्कर और स्लोअर गेदों उतना उपयोग नहीं होता था जो इस समय इंपैक्ट प्लेयर के दौर में होता है.
