IPL 2011 : क्या आप जानते है 2011 में क्रिकेट का बुखार एक बार फिर से लोगो के सर चढ़ गया था क्यों कि वर्ल्ड कप 2011 के फाइनल में जैसी हो धोनी ने टीम इंडिया को फाइनल जिताया और उसके मात्र 6 दिन बाद ही क्रिकेट का दूसरा त्यौहार आईपीएल 2011 का सीजन स्टार्ट हो गया जो क्रिकेट का पूरा मायने ही बदल दिया था.

यह आईपीएल भी पिछले सालों की तरह अपने साथ कई खुशियां लेकर आया था. इसी आईपीएल में क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर ने आईपीएल का पहला और एकलौता शतक लगाया था. इसी सीजन में ही क्रिश गेल का बल्ला भी बेंगलुरु की गलियों में गरजा था. तो आइए चलते है उस आईपीएल की दुनिया में जहां पर कई ऐसे कहानियां है जो फैंस को आज भी हैरान कर देती है.
IPL 2011 में हुई नई टीमों की एंट्री से बदला आईपीएल का फ्लेवर
आईपीएल इस सीजन में 4 साल की हो गई थी तो BCCI ने कुछ नया प्रयोग किया और आईपीएल के बैग में 8 टीम पहले से थी लेकिन इस बार BCCI ने दो नई टीमें पुणे वॉरियर्स इंडिया और कोच्चि टेकर्स केरल को भी आईपीएल के बैग में डाल दिया और इसका असर ये हुआ कि मैचों की संख्या भी बढ़कर 74 हो गई.
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यह वह दौर था जब आईपीएल के लिए मेगा ऑक्शन हुई थी जिसमें दुनिया भर की खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया और और इस सीजन में कई दिग्गज खिलाड़ी अपनी पुरानी टीम को छोड़कर अन्य टीम में शामिल हो गए और कुछ दो नई टीमों में गए. इसी सीजन में गौतम गंभीर को कोलकाता नाइट राइडर्स ने खरीदा और गौतम के कोलकाता की टीम में आते ही टीम की किस्मत ही पलट गई.
जब गेल ने बेंगलुरु में मचाया था तूफान
वर्ल्ड कप 2011 जैसे ही खत्म हुआ था और आईपीएल स्टार्ट हो गया था. कहते है कि अगर वर्ल्डकप के अलावा कुछ और अच्छा लगा तो वो था क्रिश गेल का आतिशी बल्लेबाजी. इस सीजन में गेल के लिए एक और शोक वाली बात ये है कि गेल को किसी भी टीम ने खरीदा नहीं था लेकिन जब डिर्क नैनस चोटिल हुए तब आरसीबी वाले ने गेल को अपनी टीम में शामिल किया.

आरसीबी की टीम में जैसे ही गेल शामिल हुए वैसे ही फिर वो हुआ जिसकी किसी ने कल्पना तक नहीं की थीं. आरसीबी की तरफ से कहते हुए गेल ने 12 मैच में 608 रन थोक दिए और उनको इसके लिए ऑरेंज कैप के लिए चुना गया था. क्रिस गेल ने अपनी इस पारी में 2 शानदार शतक लगाए और टीम को फाइनल में ले गए. आरसीबी फैंस कहते है कि अगर फाइनल में क्रिश गेल चले होते तो फाइनल हम जीत गए होते.
चेन्नई सुपर किंग्स का दूसरी बार ट्रॉफी पर कब्जा
अगर 2011 के साल को किसी एक खिलाड़ी के नाम करना हो तो वो नाम आता है केवल महेंद्र सिंह धोनी का, धोनी इस पूरे साल जीत के रथ पर सवार थे क्यों कि धोनी ने अप्रैल में श्रीलंका खिलाफ फाइनल में छक्का मारकर टीम इंडिया को 2011 का वर्ल्ड कप जिताया और फिर मई में चेन्नई सुपर किंग को IPL का दूसरी बार चैम्पियन बनाया.
2011 के इस फाइनल में एक बार फिर चेन्नई सुपर किंग्स पहुंची और साथ मे आरसीबी भी पहुंची थी. इस फाइनल के मैच में चेन्नई सुपर किंग ने पहले बल्लेबाजी करते हुए मुरली विजय की 95 रनों की तूफानी पारी की बदौलत 205 रन बना पाई. और इस पहाड़ जैसे रन के नीचे दबकर आरसीबी की 58 रनों से हार हो गई और चेन्नई ने इस तरह से दूसरी बार चैम्पियन जीता.
इसी मैच के जीत के बाद से ही धोनी ने खुद को साबित किया की वो कैसे एक कप्तान की तौर पर बड़े मैचों में बड़ी रणनीति बनाकर दबाव झेल सकते है.
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इस IPL के कुछ हैरान करने वाले आंकड़े
इस सीजन में भी जमकर रन बरसे तो वही विकेट भी खूब गिरे चलिए जानते इस सीजन के कुछ महत्वपूर्ण आंकड़ों के बारे में.
इस सीजन में आरसीबी कि तरफ से खेलते हुए क्रिश गेल ने 608 रन बनाए और ऑरेंज कप जीता. मुंबई इंडियंस की तरफ से खेलते हुए लसिथ मलिंगा ने 28 विकेट अपने नाम किए और पर्पल कैप जीता. इसी सीजन में क्रिश गेल ने सबसे ज्यादा 44 छक्के लगाए और इस सीजन का पहला शतक पॉल वल्थाटी ने IPL 2011 का पहला शतक लगाया और इस वर्ष के वो सबसे ज्यादा रन व्यक्तिगत रन बनाने वाले बल्लेबाज बने.

सचिन तेंदुलकर का वो शतक जब भावुक हो गए थे फैंस
आईपीएल 2011 में सबसे भावुक पल वो था जब क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर ने कोच्चि टक्कर्स केरल के खिलाफ मैच में ही 66 गेंद में 100 रन की पारी खेली थी और सचिन का IPL में उनका इकलौता और पहला शतक था. जो आज भी फैन को याद आते ही वो भावुक हो जाते है.
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दो नई टीमों का सफर कैसा रहा
IPL 2011 में कोच्चि टक्कर्स केरल और पुणे वॉरियर्स इंडिया नाम से दो टीम शामिल हुई थी.
कोच्चि टक्कर्स केरल ने भले ही ग्रुप स्टेज के मैच में मुंबई इंडियंस जैसे बड़ी टीमों हराया लेकिन कुछ विवादों के कारण ये टीम केवल एक ही मैच खेल पाई थी. जबकि दूसरी टीम पुणे वॉरियर्स इंडिया में युवराज और सौरभ गांगुली जैसे खिलाड़ी इस टीम में शामिल थे लेकिन फिर भी यह टीम कुछ ज्यादा नहीं कर पाई और प्वाइंट टेबल में काफी नीचे रही थी.
IPL 2011 का टर्निंग प्वाइंट
इस सीजन में सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट ये था कि कोलकाता नाइट राइडर्स ने जब गौतम गंभीर को टीम में शामिल किया और कप्तान बनाया. आपको बता दे कि पिछली 3 साल में एक बार भी टीम प्लेऑफ में नहीं पहुंची लेकिन जैसे ही गम्भीर को कप्तान बनाया तो टीम को गौतम गंभीर ने प्लेऑफ में पहुंचा दिया और इसके बाद से कोलकाता कभी पीछे नहीं मुड़ी.
